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शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

अनुसरण

गाँधी बाबा
आप यह नहीं कह सकते कि
आपकी कोई चीज़
हमने
नहीं अपनाई,

आपकी लाठी
हमें
बहुत पसंद आई।

- देवी प्रसाद मिश्र
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हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद 

सोमवार, 16 जून 2025

प्रत्युत्तर

पड़ताली तर्जनी
हमारे पास है औ’
दिखाते हैं वे
अँगूठा-समाधान!

- देवी प्रसाद मिश्र
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हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद 

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023

औरतें यहाँ नहीं दिखतीं

औरतें यहाँ नहीं दिखतीं
वे आटे में पिस गई होंगी
या चटनी में पुदीने की तरह महक रही होंगी
वे तेल की तरह खौल रही होंगी जिसमें
घर की सबसे ज़रूरी सब्ज़ी पक रही होगी
गृहस्थाश्रम की झाड़ू बनकर
अंधेरे कोने में खड़े होकर
वे घरनुमा स्थापत्य का मिट्टी होना देखती होंगी
सीलन और अंधेरे की अपठ्य पांडुलिपियाँ होकर
वे गल रही होंगी
वे कुएँ में होंगी या धुएँ में होंगी
आवाज़ें नहीं कनबतियाँ होकर वे
फुसफुसा रही होंगी
तिलचट्टे-सी कहीं घर में दुबकी होंगी वे
घर में ही होंगी
घर के चूहों की तरह वे
घर छोड़कर कहाँ भागेंगी
चाय पिएँ यह
उनकी ही बनाई है।

- देवी प्रसाद मिश्र।
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विजया सती की पसंद