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सोमवार, 8 जुलाई 2024

गति

यहाँ कोई गति नहीं पा सकता
बिना शुल्क दिए
चाहे वह रोहित ही क्यों न हो
देना ही होगा
शुल्क तुम्हें
शैव्या!
चाहे वह फटा वस्त्र ही क्यों न हो
यही आदेश है
इसी का पालन कर्तव्य है।
किसे मिलती है गति
बिना शुल्क दिए
कहाँ जलता है शव
कहाँ करता है जीव
अंतरिक्ष गमन
बिना शुल्क दिए।
चुकाना ही होगा कर
जो निर्धारित है
मुझसे विवाद अकारथ है
विवाद से नहीं चलतीं व्यवस्थाएँ
वे अनुगमन से ही जीवित हैं
विवाद से मनुष्य जीता है
लेकिन गति नहीं पाता।
कोई नहीं पाता गति
बिना शुल्क दिए
वह तुम्हें चुकाना ही होगा।

- पुरुषोत्तम अग्रवाल 
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 

बुधवार, 3 जुलाई 2024

अश्वमेध

तुम बहुत सरपट दौड़े हो
थोड़ा ठहर जाओ
न, तुम नहीं थके,
जानता हूँ
लेकिन तुम्हारी दौड़ ने बहुतों को कुचला है
ठहर जाओ।

तुम्हारी रगों में फड़कती बिजली
तुम पर नहीं
दूसरों पर गिरती है
कोई वल्गा नहीं तुम्हारे मुँह में
फिर भी तुम्हारी पीठ खाली नहीं
वहाँ सवार है पताका
जिसकी फहराती नोंक
तुम्हें नहीं दूसरों को चुभती है
ठहर जाओ।

तुम पूजित हो, अलंकृत हो
ऊर्जा तुममें छटपटाती है
सारी दूब को रौंदकर जब तुम लौटोगे
बिना थके भूमंडल को नाप लेने के
उन्माद से काँपते, सिर्फ़, सिर्फ़ उत्तेजना के कारण
हाँफते
तब तुम्हें काट डालेंगे
वे ही लोग – जिनके लिए तुम दौड़े थे।

वे काट डालेंगे
तुम्हारा प्रचंड मस्तक।
तुम्हारा मेध
उनका यज्ञ है।

-  पुरुषोत्तम अग्रवाल
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से