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बुधवार, 16 अक्टूबर 2024

सितारे

अँधेरी रातों में
दिशा ज्ञान के लिए
सितारों का मोहताज होना
अब ज़रूरी नहीं
चमकते सितारे
रौशनी का भ्रम लिए
सत्ता के आलोक में टिमटिमाते
एक-दूसरे का सहारा लेकर
अपने-अपने स्थान पर
संतुलन बनाने के फेर में हैं
हर सितारा
अपने ही प्रकाश से
आलोकित होने का दंभ लिए
उनकी मुठ्ठी में बंद 
सूरज की उपस्थिति से बेख़बर है।

 - शरद कोकास
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संपादकीय चयन 
 

मंगलवार, 22 अगस्त 2023

अनकही

वह कहता था 
वह सुनती थी
जारी था एक खेल
कहने सुनने का 
खेल में थी दो पर्चियाँ
एक में लिखा था ‘कहो’
एक में लिखा था ‘सुनो’ 
अब यह नियति थी 
या महज़ संयोग
उसके हाथ लगती रही 
वही पर्ची
जिस पर लिखा था ‘सुनो’
वह सुनती रही 
उसने सुने आदेश
उसने सुने उपदेश
बन्दिशें उसके लिए थीं
उसके लिए थीं वर्जनाएँ 
वह जानती थी
कहना सुनना नहीं हैं 
केवल हिंदी की क्रियाएँ
राजा ने कहा ज़हर पियो
वह मीरा हो गई
ऋषि ने कहा पत्थर बनो
वह अहिल्या हो गई 
प्रभु ने कहा 
घर से निकल जाओ 
वह सीता हो गई 
चिता से निकली चीख 
किन्हीं कानों ने नहीं सुनी 
वह सती हो गई 
घुटती रही उसकी फरियाद
अटके रहे उसके शब्द
सिले रहे उसके होंठ
रुँधा रहा उसका गला 
उसके हाथ कभी नहीं लगी
वह पर्ची
जिस पर लिखा था - 'कहो'

- शरद कोकास।
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