हेमंत जोशी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हेमंत जोशी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 19 फ़रवरी 2025

कई बार ऐसा हुआ

कई बार ऐसा हुआ
शब्द हाथों से छूटकर
टूटकर बिखर गए
ज़मीन पर

अपनी ही तलाश में
शब्दों को गढ़ा कई बार
आवरण में रखा सहेजकर
और वो दर्द सहा
जो ख़ुद को छिपाने में रहा

कई बार ऐसा हुआ
अपने ही ख़िलाफ़ तन गए हम
यूँ ही ख़ुद से रूठकर

- हेमंत जोशी
---------------

संपादकीय चयन 

बुधवार, 18 दिसंबर 2024

शब्द

शब्द महज़ शब्द नहीं

पूरा संसार है
केंचुए-सा रेंगता
वायलिन-सा बजता
रंगों-सा बिखरता

मुँह खुलता है जब भी
अंकुर-सा प्रस्फुटित होता है
हाथ के खिलाफ़ मुट्ठी-सा तनता है
युद्ध में ज़ोरों से फटता है
युद्ध के विरुद्ध
सफ़ेद पताका-सा लहराता है
शब्द।

- हेमंत जोशी
---------------

कविता कोश से साभार