हरीश करमचंदाणी
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गुरुवार, 20 जून 2024
पहल
बच्चों को शोर मचाने से रोको मत
बच्चों को सोने को मत कहो
बच्चे सो जाएँगे तो जागेगा फिर कौन
बच्चे चुप हो जाएँगे तो जगाएगा फिर कौन
- हरीश करमचंदाणी
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से
सोमवार, 17 जून 2024
दोष
नक्शा बहुत साफ़ था
मेरे मन में था
मैं चाहता था
वह निर्दोष साबित हो
क्योंकि वह निर्दोष था
और इसीलिए यह साबित करना
बहुत मुश्किल था।
- हरीश करमचंदाणी
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से
शुक्रवार, 14 जून 2024
अनजान होना
चिड़िया को नहीं मालूम कितना मीठा गाती है
मोगरा भी है बेखबर अपनी महक से
और हवा जो बहती रहती हरदम
नहीं पता उसे कितनी ज़रुरी है वह
और आदमी जो जानता इतना इतना
अनजान होना हमेशा बुरा तो नहीं होता
- हरीश करमचंदाणी
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से
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बात सीधी थी पर
बात सीधी थी पर एक बार भाषा के चक्कर में ज़रा टेढ़ी फँस गई। उसे पाने की कोशिश में भाषा को उलटा पलटा तोड़ा मरोड़ा घुमाया फिराया कि बात या तो ब...
खजुराहो में मूर्तियों के पयोधर
पत्थरों में कचनार के फूल खिले हैं इनकी तरफ़ देखते ही आँखों में रंग छा जाते हैं मानो ये चंचल नैन इन्हें जनमों से जानते थे। मानो हृदय ही फूला...
ट्राम में एक याद
चेतना पारीक कैसी हो? पहले जैसी हो? कुछ-कुछ ख़ुश कुछ-कुछ उदास कभी देखती तारे कभी देखती घास चेतना पारीक, कैसी दिखती हो? अब भी कविता लिखती हो? ...