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शनिवार, 19 जुलाई 2025

चौमासा

आषाढ़-सा उठाव
सावन-सा भराव
भादों-सा इकसार
आश्विन-सा अमृत-छिड़काव

चौमासे की तरह
तुम्हारे प्यार के भी
कई ढंग हैं।

- नंदकिशोर आचार्य
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शुक्रवार, 30 मई 2025

अभिनय क्या आत्महत्या है



विस्मित देखते हैं लोग

मुझको अन्य होते हुए

और रेशा-रेशा मर रहा हूँ मैं

अनुपल जन्म लेता हुआ :

यही तो होता है हर बार।


अभिनय क्या आत्महत्या है

नए जन्म के लिए

जिसमें अपने को ख़ुद

जनता हूँ मैं

जनकर मार देता हूँ!


 - नंदकिशोर आचार्य

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- हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 



बुधवार, 27 नवंबर 2024

बस्ती

सूनापन हो तो क्या

कृतज्ञ हूँ मैं
बसकर मुझमें
तुमने
बस्ती जो किया
मुझे।

- नंदकिशोर आचार्य
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संपादकीय चयन 

मंगलवार, 26 नवंबर 2024

उलझन

चुप-से हैं पर
गहरी उलझन में हैं शब्द
क्या करें वे मेरा

मुझ अपंग का
जो निवेदित है उन्हें

ले चलें
मेरी बैसाखी बनकर
या घिसटने दें
इस ऊबड़-खाबड़ धरती पर
मुझको
मेरे ज़ख़्मों से रिसते हुए।

 - नंदकिशोर आचार्य
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संपादकीय चयन 

सोमवार, 25 नवंबर 2024

मैं ही तो हो गया होता हूँ शब्द

नहीं, कविता रचना नहीं
सुबूत है कि
मैंने अपने को रचा है।

मैं ही तो हो गया होता हूँ शब्द
फुफकारते समुद्र में लील लिया जाकर भी
सुबह के फूल-सा खिल आता हुआ।
फूल में फूटकर
अपने को ही तो रच रहा होता है पेड़!

अरे!
तो क्या तुम भी
मुझे रचकर ही
ख़ुद को रच पाते हो?

 - नंदकिशोर आचार्य
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संपादकीय चयन 

रविवार, 24 नवंबर 2024

कई रंग हैं

मुस्कान-सी हल्की
आँख-सी खुली
खुले अंग-सी कौंध
आलिंगन-सी घनी

हरियाली के भी कई रंग हैं।

- नंदकिशोर आचार्य
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संपादकीय चयन 

मंगलवार, 23 जनवरी 2024

अभिधा में नहीं

जो कुछ कहना हो उसे
ख़ुद से भी चाहे
व्यंजना में कहती है वह
कभी लक्षणा में
अभिधा में नहीं लेकिन कभी

कोई अदालत है प्रेम जैसे
क़बूल अभिधा में जो
कर लिया
सज़ा से बचेगी कैसे!

- नंदकिशोर आचार्य।
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संपादकीय चयन 

बुधवार, 20 दिसंबर 2023

शरद

जा चुका बालापन
यौवन की दहलीज़ पर है शरद
नहीं पूनो, चौदस की रात
हवा में हल्की-सी ख़ुनकी
प्यार का जग रहा
जैसे पहला एहसास।

- नंदकिशोर आचार्य।
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संपादकीय चयन