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शनिवार, 7 जून 2025

एक ही प्रेम

एक प्रेम काफ़ी है ज़िंदा रहने के लिए 
एक ही प्रेम नष्ट होने के लिए 
पर्याप्त है एक प्रेम का दंड

एक का ही वरदान कर देता है धन्य 
एक प्रेम की निराशा फैल जाती है दूर तक
और वही थाम लेता है आशा का चिथड़ा 
एक प्रेम से ऊब पैदा होती है, उसी से तृप्ति

एक प्रेम सूर्योदय और सूर्यास्त के लिए 
वही काफ़ी है रात में चाँद सितारों के वास्ते
एक प्रेम की व्यग्रता हो सकती है बर्दाश्त
सँभाली जा सकती है बस एक प्रेम की प्रसन्नता 
एक प्रेम गर्व से कर देता है सिर ऊँचा

और वही बैठा देता है घुटनों के बल 
जब कोई नहीं रहता, कुछ नहीं बचता 
सब विदा ले चुके होते हैं तो अतल की तलहटी में 
सूखे उजाड़ जीवन में टिमटिमाता है वही एक प्रेम 
उसकी टिमटिमाहट दिखती है प्रखर रौशनी की तरह 
जब सब तरफ़ कोलाहल, आपाधापी और घबराहट होती है

एक वही प्रेम हाथ थामकर देता है आत्मीय एकांत 
और वही धकेल देता है जीवन की भागमभाग में 
एक ही प्रेम कर देता है जीना मुश्किल 
और एक उसी के लिए तो अटकी हुई है यह साँस।

- कुमार अंबुज 
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विजया सती की पसंद 

गुरुवार, 30 नवंबर 2023

एक कम है

अब एक कम है तो एक की आवाज कम है
एक का अस्तित्व एक का प्रकाश
एक का विरोध
एक का उठा हुआ हाथ कम है
उसके मौसमों के वसंत कम हैं
एक रंग के कम होने से
अधूरी रह जाती है एक तस्वीर
एक तारा टूटने से भी वीरान होता है आकाश
एक फूल के कम होने से फैलता है उजाड़ सपनों के बागीचे में
एक के कम होने से कई चीजों पर फर्क पड़ता है एक साथ
उसके होने से हो सकने वाली हज़ार बातें
यकायक हो जाती हैं कम
और जो चीज़ें पहले से ही कम हों
हादसा है उनमें से एक का भी कम हो जाना

मैं इस एक के लिए
मैं इस एक के विश्वास से
लड़ता हूँ हज़ारों से
खुश रह सकता हूँ कठिन दुखों के बीच भी
मैं इस एक की परवाह करता हूँ।

- कुमार अंबुज।
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विजया सती के सौजन्य से