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सोमवार, 6 जनवरी 2025

साथ

अँधेरे में हो
इसीलिए
अकेले हो

रौशनी में आओगे
तो कम से कम
अपने साथ
एक परछाईं 
तो जुड़ी पाओगे।

- वेणु गोपाल
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संपादकीय चयन 

गुरुवार, 19 दिसंबर 2024

हर हाल में बेजोड़

तिनका हूँ
सूखता हुआ। 

लेकिन फिर भी
जंगल का एक बेजोड़ हिस्सा। 

जब हरा-भरा होने में था
तो सूखने में भी हूँ।

- वेणु गोपाल
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संपादकीय चयन 

मंगलवार, 10 दिसंबर 2024

उड़ते हुए

कभी
अपने नवजात पंखों को देखता हूँ
कभी आकाश को
उड़ते हुए।

लेकिन ऋणी मैं फिर भी
ज़मीन का हूँ
जहाँ
तब भी था
जब पंखहीन था
तब भी रहूँगा
जब पंख झर जाएँगे।

- वेणु गोपाल
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संपादकीय चयन