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शनिवार, 2 दिसंबर 2023

नया शब्द

जब कोई नया शब्द 
कानों में पड़ता है, 
अर्थ जानने को हम उत्सुक 
हो जाते हैं

देखें तो शब्द वह 
पुराना ही होता है, 
कभी-कभी गर्द-धूल 
उस पर पड़ जाती है
कभी-कभी हम उससे 
बेख़बर होते हैं। 

और जब हटाकर हम 
गर्द वह, 
सुनते-देखते उसे 
एक ही क़तार में कई-कई छवियाँ 
बन जाती हैं। 

शब्दों की संपदा 
अर्थों की संपदा— 
जीवन के जीवन 
गहरे और गहरे तक 
हमें पहुँचाती है।

- प्रयाग शुक्ल।
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संपादकीय पसंद 

गुरुवार, 23 नवंबर 2023

चुप रहो या बोलो

या तो चुप रहो 
या बोलो 
या तो बोलो 
या चुप रहो। 

बोलो तो इस तरह 
कि भीतर की चुप्पियों 
तक ले जाए 
बोलना। 

रहो चुप तो इस तरह 
कि भीतर की चुप्पियाँ 
गहरी, 
अथाह, बोलें।

- प्रयाग शुक्ल।