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शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

अब तक नहीं लिखा

जाने क्या-क्या लिखा अभी तक

लेकिन जो लिखना था हमको, 

अब तक नहीं लिखा। 


किसने सोखे थे सपनों के 

रंग उजाले वाले, 

किसने जगा दिए निद्रा पर

चिंताओं के ताले 

किसके डर से रही काँपती,

मन की दीपशिखा

अब तक नहीं लिखा।


किसके आश्वासन से टूटी

आशाओं की हिम्मत,

किसने कर्म छीनकर हमसे

दे दी खोटी किस्मत

घोर गरीबी का यह रस्ता,

किसने दिया दिखा

अब तक नहीं लिखा।


किसने सत्य, अहिंसा मारे

किसने शांति चुराई

किसने छीनी है वाणी से

शब्दों की अँगड़ाई

भाषा के सीने पर किसने, 

आरा तेज रखा

अब तक नहीं लिखा।

 
- अश्वघोष

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- विजया सती के सौजन्य से

सोमवार, 21 अक्टूबर 2024

मुक्ति का उल्लास ही

मुक्ति का उल्लास ही
हर ओर छाया
प्यार के इस लोक को किसने बनाया?

रूप, रस और गंध की
सरिता मचलती
सुधि नहीं रहती यहाँ
पल को भी पल की
विश्व व्यंजित नेह कण-कण में समाया
प्यार के इस लोक को किसने बनाया?

आचरण को व्याकरण
भाता नहीं है
शब्द का संदर्भ से
नाता नहीं है
मुक्ति के विश्वास की उन्मुक्त काया
प्यार के इस लोक को किसने बनाया?

मौसमों ने त्यागकर
ऋतुओं के डेरे
कर लिए इस लोक में
आकर बसेरे
हार में भी जीत का आनंद आया
प्यार के इस लोक को किसने बनाया?

- अश्वघोष
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