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गुरुवार, 28 नवंबर 2024

घड़ी की दुकान

घड़ी की दुकानों में
समय नई-नई पोशाकों में
पोज़ देता है
(गतिशीलों को पोज़ देने की फ़ुर्सत नहीं)

रुकी घड़ियाँ दिलासा हैं
कि समय अभी शुरू हुआ नहीं

घड़ी एक गुल्लक है
जिसमें भरी है
समय की काल्पनिकता

अगर इस दुकान में बेहिसाब समय भरा है
तो मुमकिन है, 
बुज़ुर्ग किसी रात लूट ले जाएँ

अपनी घड़ी मिलाने के लिए
ये जगह अत्यंत भ्रामक

एक तश्तरी में
पुर्ज़ा-पुर्ज़ा खुली घड़ी कहती है-

समय और घड़ी दो असंगत चीज़ें हैं
घड़ी की मरम्मत संभव है,

समय की नहीं।

- हेमंत देवलेकर
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संपादकीय चयन 

गुरुवार, 21 नवंबर 2024

हार्मनी

सफ़ेद और काला अलग रहेंगे
तो नस्ल कहाएँगे
मिलकर रहेंगे तो संगीत

हारमोनियम
साहचर्य की एक मिसाल है
उँगलियों के बीच की ख़ाली जगह
उँगलियों से भर देने के लिए है

- हेमंत देवलेकर
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बिजुका से साभार 

मंगलवार, 25 जून 2024

पेड़ों का अंतर्मन

कल मानसून की पहली बरसात हुई
और आज यह दरवाज़ा ख़ुशी से फूल गया है
खिड़की दरवाज़े महज़ लकड़ी नहीं हैं
विस्थापित जंगल होते हैं
मुझे लगा, मैं पेड़ों के बीच से आता-जाता हूँ,
टहनियों पर बैठता हूँ
पेड़ों की खोखल में रहता हूँ 
मैं, जंगल में घिरा हूँ
किंवदंतियों में रहने वाला
आदिम ख़ुशबू से भरा जंगल
कल मौसम की पहली बारिश हुई
और आज यह दरवाज़ा
चौखट में फँसने लगा है
वह बंद होना नहीं चाहता
ठीक दरख़्तों की तरह
एक कटे हुए जिस्म में
पेड़ का खून फिर दौड़ने लगा है
और यह दरवाज़ा बचपन की स्मृतियों में खो गया है
याद आने लगा है
किस तरह वह बाँहें फैलाकर
हज़ारों हथेलियों में समेटा करता था
बारिश को
और झूमने लगता था
वह स्मृतियों में फिर हरा हुआ है। 

-  हेमंत देवलेकर
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 

मंगलवार, 19 मार्च 2024

हँसी का रंग हरा होता है

हँसी का रंग हरा होता है 
जहाँ-जहाँ भी हरापन है 
तेरे ही खिलखिलाने की अनुगूँज है वहाँ-वहाँ 

कल्पना का रंग होता है आसमानी 
जहाँ तक पसरा हुआ है आसमान 
तेरी कल्पनाओं के दायरे में आता है... 

ज़िद का रंग होता है बहुत गहरा 
इतना कि एक बार जिस चीज़ की रट लगा लेती है तू 
हमारी किसी भी समझाइश का रंग 
चढ़ता ही नहीं उस पर 

और रोने का रंग...? 
वह तो किसी रंग जैसा 
होता ही नहीं 
क्योंकि जब रोती है तू 
रंगों के चेहरे पड़ जाते हैं फीके 

रंग जो हमेशा 
भरपूर चटखीलेपन में 
जीना चाहते हैं 
चाहते हैं पृथ्वी भर हरापन 

क्योंकि तेरी हँसी का रंग 
हरा होता है।

- हेमंत देवलेकर।
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