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गुरुवार, 18 जुलाई 2024

इतिहास का पहिया

चुटकुला कुछ यूँ था
एक आदिम विज्ञानी ने
चौकोर पहिए का इजाद किया था
उसका कहना था
गोल पहिए पीछे भी सरक सकते हैं

बात में दम तो है

इतिहास का पहिया गोल है
हर पहिए की तरह
वह आगे सरकता है
जब जनता
उसे सामने की ओर धकेलती है
ख़ासकर जब रास्ता चढ़ाई का हो
वर्ना वह पीछे सरक सकती है

इतना तो ख़ैर तय है

दिक्कत सिर्फ़ इतनी है
उसे धकेलने वालों की अगली पाँतों में
कुछ ऐसे भी शख़्स हैं
जिनके दिमाग चौकोर हैं
और वे हमेशा इस फ़िराक़ में रहते हैं
गोल पहिए को चौकोर बना दिया जाए 
ताकि वह पीछे की ओर न सरके

- उज्ज्वल भट्टाचार्य
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 

शनिवार, 13 जुलाई 2024

कायाकल्प

देखते ही देखते
मेरी आँखों के सामने
ए० टी० एम० मशीन
सुंदरी राजकन्या बन गई।
मैंने उसे बाँहों में भर लिया।
सुंदरी राजकन्या ने
मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
और मैं ए० टी० एम० मशीन बन गया।

- उज्ज्वल भट्टाचार्य
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 

मंगलवार, 21 मई 2024

पहला और आख़िरी

वह पहली घड़ी थी
जब मैंने पूछा था -
तुम कौन हो?

और मेरा सवाल
गूँजते हुए
जवाब बन गया -

मैं तुम हूँ!

बाक़ी ज़िंदगी गुज़र गई
तुम और मैं के इस खेल में।

- उज्ज्वल भट्टाचार्य
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हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद