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बुधवार, 9 अक्टूबर 2024

कोई अधूरा पूरा नहीं होता

कोई अधूरा पूरा नहीं होता
और एक नया शुरू होकर
नया अधूरा छूट जाता
शुरू से इतने सारे
कि गिने जाने पर भी अधूरे छूट जाते
 
परंतु इस असमाप्त
अधूरे से भरे जीवन को
पूरा माना जाए, अधूरा नहीं
कि जीवन को भरपूर जिया गया
 
इस भरपूर जीवन में
मृत्यु के ठीक पहले भी मैं
एक नई कविता शुरू कर सकता हूँ
मृत्यु के बहुत पहले की कविता की तरह
जीवन की अपनी पहली कविता की तरह
 
किसी नए अधूरे को अंतिम न माना जाए।
 
- विनोद कुमार शुक्ल
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हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद 
 

गुरुवार, 16 नवंबर 2023

हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था

हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था 
व्यक्ति को मैं नहीं जानता था 
हताशा को जानता था 
इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया 
मैंने हाथ बढ़ाया 
मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ 
मुझे वह नहीं जानता था 
मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था 
हम दोनों साथ चले 
दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे 
साथ चलने को जानते थे।

- विनोद कुमार शुक्ल।
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विजया सती की पसंद 

रविवार, 24 सितंबर 2023

जो मेरे घर कभी नहीं आएँगे

जोमेरेघरकभीनहींआएँगे
मैंउनसेमिलने
उनकेपासचलाजाऊँगा।

एकउफनतीनदीकभीनहींआएगीमेरेघर
नदीजैसेलोगोंसेमिलने
नदीकिनारेजाऊँगा
कुछतैरूँगाऔरडूबजाऊँगा
पहाड़,टीले,चट्टानें,तालाब
असंख्यपेड़खेत
कभीनहींआएँगेमेरेघर
खेत-खलिहानोंजैसेलोगोंसेमिलने
गाँव-गाँव,जंगल-गलियाँजाऊँगा।

जोलगातारकाममेंलगेहैं
मैंफ़ुरसतसेनहीं
उनसेएकज़रूरीकामकीतरह
मिलतारहूँगा-

इसेमैंअकेलीआख़िरीइच्छाकीतरह
सबसेपहलीइच्छारखनाचाहूँगा।

- विनोद कुमार शुक्ल।
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प्रगति टिपणीस की पसंद