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शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

सौ-सौ सूरज

रात के
गहन अँधेरे में
सूरज
अपना वादा
तोड़कर
चाँद को
यूँ अकेला
छोड़कर
चल दिया

नज़र के
आसमान से दूर
देखता रहा
चाँद
उसके मिटते
निशान को
हर पल
मद्धम हो रहे
उसके प्रकाश को

उसके हर
क़दम के साथ
उसने
एक उम्मीद बाँधी
अपने प्रेम की
बेड़ी के साथ
उसके
क़दमों के नीचे
सपनों की नींव डाली

वो कदम
तो नहीं लौटे
जो उस रात
नहीं रूके थे
लेकिन
सपनों के बीजों से
एक घना पेड़
उग आया
जिस पर
एक नहीं
सौ-सौ सूरज उगे थे

- किरण मल्होत्रा
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हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद 

गुरुवार, 28 अगस्त 2025

कुछ पल

कुछ पल
साथ चले भी कोई
तो क्या होता है
क़दम-दर-क़दम
रास्ता तो
अपने क़दमों से
तय होता है

कुछ क़दम संग
चलने से फिर
न कोई अपना
न पराया होता
बस, केवल
वे पल जीवंत 
और
सफ़र सुहाना होता है

- किरण मल्होत्रा
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हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद

शनिवार, 1 जून 2024

जीवन के अर्थ

तुमने जो कहा
वो
मैं समझी नहीं 
मैंने 
जो समझा
वो
तुमने कहा नहीं 

इस
कहने-सुनने में
कितने दिन
निकल गए
और
फिर समझने में
शायद
पूरी ज़िंदगी 
निकल जाए

लेकिन
फिर भी
अगर तुम
मेरी समझ को
समझ सको
किसी दिन
ज़िंदगी को
शायद
अर्थ मिल जाए
उस दिन

- किरण मल्होत्रा
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 

गुरुवार, 30 मई 2024

विविधता

पौधों की तरह
लोगों की भी
कई किस्में हैं
कई नस्लें हैं
कुछ लोग
गुलाब की तरह
सदा मुस्कुराते हुए
कुछ रजनीगंधा की तरह
सिर्फ शामों में
महकते हुए
कुछ बरगद की तरह
जीवन की
गहराइयों और
सुदूर आकाश तक
फैले हुए
कुछ घास की तरह
गहराइयों और ऊँचाइयों से
अनभिज्ञ
जीवन की ऊपरी तह तक
सिमटे हुए
कुछ सूरजमुखी की तरह
बाह्यमुखी
कुछ छुईमुई की तरह
अंतर्मुखी
कुछ धतूरे की तरह
जहरीले
कुछ नागफनी की तरह
कंटीले
कुछ सदाबहार की तरह
हरदम साथ निभाने वाले
कुछ मौसमी फूलों की तरह
मौसम के साथ बदलने वाले
प्रकृति
कितनी विविधता
तुममें समाई
बहुत जानकर भी
आँखें कहाँ
ज़िंदगी को
ठीक से
समझ पाई

- किरण मल्होत्रा   
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से