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शनिवार, 17 अगस्त 2024

एक बौनी बूँद

एक बौनी बूँद ने
मेहराब से लटक
अपना कद
लंबा करना चाहा

बाकी बूँदें भी
देखा-देखी
लंबा होने की
होड़ में
धक्का-मुक्की
लगा लटकीं

क्षण भर के लिए
लंबी हुई
फिर गिरीं
और आ मिलीं
अन्य बूँदों में
पानी पानी होती हुई
नादानी पर अपनी।

- दिव्या माथुर
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हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद 

रविवार, 4 अगस्त 2024

नृत्य

धूसर रेत के
टीले पर
चाँदनी
आई उतर
साठ कली का
घाघरा
अँगिया
एक कली भर
पीले, लाल
सुर्ख रंगों से
रंगी थी
उसकी चूनर
वाणी सुरीली
कमर लचीली
पाँव उठे जो इस गोरी के
कैसे झूमी रेत नचीली।

- दिव्या माथुर
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हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से