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सोमवार, 1 जनवरी 2024
नया साल
चमक रहे हैं
हमारे स्वागत में
दिन के नए पन्ने
इन्हीं में लिखनी है हमें
अपनी कहानियाँ
देना है अपना बयान
कि इन्हें बचना है
आग की लपटों से
ख़ून के धब्बों से
- निर्मल आनंद।
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बात सीधी थी पर एक बार भाषा के चक्कर में ज़रा टेढ़ी फँस गई। उसे पाने की कोशिश में भाषा को उलटा पलटा तोड़ा मरोड़ा घुमाया फिराया कि बात या तो ब...
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