मुनव्वर राना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मुनव्वर राना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2025

शेर कहने लगे

किया है अपने को बर्बाद, शेर कहने लगे
जब आ गई है तेरी याद, शेर कहने लगे

ये नहर दूध की हम भी निकाल सकते हैं
मज़ा तो जब है के फ़रहाद शेर कहने लगे

न देख इतनी हिक़ारत से हम अदीबों को
न जाने कब तेरी औलाद शेर कहने लगे

बड़े बड़ों को बिगाड़ा है हमने ऐ ‘राना’
हमारे लहज़े में उस्ताद शेर कहने लगे

- मुनव्वर राना
---------------

हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद 

शुक्रवार, 7 जून 2024

हम पत्थर उठाते हैं

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं
जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी- चादर उठाते हैं

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब काँधा नहीं देते
हमारे गाँव में छप्पर भी सब मिलकर उठाते हैं

इन्हें फ़िरक़ापरस्ती मत सिखा देना कि ये बच्चे
ज़मीं से चूमकर तितली के टूटे पर उठाते हैं

समुन्दर के सफ़र से वापसी का क्या भरोसा है
तो ऐ साहिल, ख़ुदा हाफ़िज़ कि हम लंगर उठाते हैं

ग़ज़ल हम तेरे आशिक़ हैं मगर इस पेट की ख़ातिर
क़लम किस पर उठाना था क़लम किसपर उठाते हैं

बुरे चेहरों की जानिब देखने की हद भी होती है
सँभलना आईनाख़ानों, कि हम पत्थर उठाते हैं

- मुनव्वर राना
----------------

अनूप भार्गव जी के सौजन्य से