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शनिवार, 3 मई 2025

कामना

 एक सुई चाहिए

हो सके तो एक दर्जी की उंगलियाँ भी

सौ-सौ चिथड़ों को जोड़कर

एक बड़ी सी कथरी बनाने के लिए


एक साबुन चाहिए

हो सके तो धोबिन की धुलाई का मर्म भी

बीसों घड़ों का पानी उलीचकर

कामनाओं का चीकट धोने-सुखाने के लिए


एक झोला चाहिए

हो सके तो कवियों का सन्ताप भी

अर्थ गँवा चुके ढेरों शब्दों को उठाकर

नयी राह की खोज में जाने के लिए


सुई साबुन पानी और कविता के अलावा

कुछ और भी चाहिए

शायद भाषा का झाग भी

मटमैले हो चुके ढाई अक्षर को चमकाकर

एक नया व्याकरण बनाने के लिए.


- यतीन्द्र मिश्र

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- हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 

रविवार, 27 अप्रैल 2025

बानी

उसने बानी दिया
जैसे रेत में ढूँढ़कर पानी दिया

उसने बानी दिया
जैसे रमैया से पूछकर
गुरु ग्यानी दिया

उसने बानी दिया
जैसे जीवन को नया मानी दिया

- यतीन्द्र मिश्र

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- हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 


गुरुवार, 2 जनवरी 2025

रफ़ू

जहाँ से धोखा हुआ धागों को आपसी रिश्तों में
खुली है अंदर की बात सबसे पहले वहीं पर
परेशान हैं धागे कैसे बची रहेगी
गुलबूटों की मैत्री की अविभक्त मजबूती
और कपड़े के समाज में उनकी पारस्परिकता
तार-तार होने से बचानी है
संबंधों की अटूट डोर

ऐसे में किसी को आया है ख़याल
रफ़ू के बारे में
सिलनी होंगी अब सारी खुली सीवनें
गूँथना होगा एक दूसरे को
फिर उसी तटस्थ भाव से

पुराने दिनों को याद करके
रूठ गए हर धागे को मनाना होगा
पच्चीकारी की रंगीन दुनिया से
निरपेक्ष रहकर
मिटानी होंगी धागों को आपसी ग़लतफ़हमियाँ
और उनके बीच बढ़ी हुई दूरी
एक बार नए सिरे से

नाज़ुक धरातल पर बुना हुआ यह सहमेल
रिश्तों की मज़बूत बुनियाद के बारे में
बहुत कुछ सिखाता है हमें।

- यतीन्द्र मिश्र
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संपादकीय चयन 

रविवार, 6 अक्टूबर 2024

बाज़ार में खड़े होकर

कभी बाज़ार में खड़े होकर
बाज़ार के ख़िलाफ़ देखो

उन चीज़ों के ख़िलाफ़ 
जिन्हें पाने के लिए आए हो इस तरफ़

ज़रूरतों की गठरी कंधे से उतार देखो
कोने में खड़े होकर नक़ली चमक से सजा
तमाशा-ए-असबाब देखो

बाज़ार आए हो कुछ लेकर ही जाना है
सब कुछ पाने की हड़बड़ी के ख़िलाफ़ देखो

डंडी मारने वाले का हिसाब और उधार देखो
चैन ख़रीद सको तो ख़रीद लो
बेबसी बेच पाओ तो बेच डालो

किसी की ख़ैर में न सही अपने लिए ही
लेकर हाथ में जलती एक मशाल देखो

कभी बाज़ार में खड़े होकर
बाज़ार के ख़िलाफ़ देखो

- यतीन्द्र मिश्र 
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हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद