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गुरुवार, 25 अप्रैल 2024

क्या तुम जानते हो?

 क्या तुम जानते हो

पुरुष से भिन्न

एक स्त्री का एकांत?

घर, प्रेम और जाति से अलग

एक स्त्री को उसकी अपनी ज़मीन

के बारे में बता सकते हो तुम?

बता सकते हो

सदियों से अपना घर तलाशती

एक बेचैन स्त्री को

उसके घर का पता?

क्या तुम जानते हो

अपनी कल्पना में

किस तरह एक ही समय में

स्वयं को स्थापित और निर्वासित

करती है एक स्त्री?

सपनों में भागती

एक स्त्री का पीछा करते

कभी देखा है तुमने उसे

रिश्तों के कुरुक्षेत्र में

अपने आपसे तड़ते?

 

तन के भूगोल से परे

एक स्त्री के

मन की गाँठें खोल कर

कभी पढ़ा है तुमने

उसके भीतर का खौलता इतिहास?

पढ़ा है कभी

उसकी चुप्पी की दहलीज़ पर बैठ

शब्दों की प्रतीक्षा में उसके चेहरे को?

उसके अंदर वंशबीज बाते

क्या तुमने कभी महसूसा है

उसकी फैलती जड़ों को अपने भीतर?

क्या तुम जानते हो

एक स्त्री के समस्त रिश्ते का व्याकरण?

बता सकते हो तुम

एक स्त्री को स्त्री-दृष्टि से देखते

उसके स्त्रीत्व की परिभाषा?

अगर नहीं!

तो फिर जानते क्या हो तुम

रसोई और बिस्तर के गणित से परे

एक स्त्री के बारे में...?

- निर्मला पुतुल

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संपादकीय चयन