स्मृतियों का समुद्र
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
स्मृतियों का समुद्र
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
गुरुवार, 7 दिसंबर 2023
स्मृतियों का समुद्र
धरी रह जाएँगी सारी की सारी
घृणाएँ, कटुताएँ
जलकर राख हो जाएँगी
रस्सी की तरह ऐंठी हुई
सारी की सारी
ईर्ष्याएँ, अहम्मन्यताएँ
बचा रहेगा
सिर्फ एक
प्यार के लिए पछाड़ें खाता
उठता गिरता स्मृतियों का समुद्र
- भगवत रावत।
----------------
विजया सती के सौजन्य से
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
बात सीधी थी पर
बात सीधी थी पर एक बार भाषा के चक्कर में ज़रा टेढ़ी फँस गई। उसे पाने की कोशिश में भाषा को उलटा पलटा तोड़ा मरोड़ा घुमाया फिराया कि बात या तो ब...
खजुराहो में मूर्तियों के पयोधर
पत्थरों में कचनार के फूल खिले हैं इनकी तरफ़ देखते ही आँखों में रंग छा जाते हैं मानो ये चंचल नैन इन्हें जनमों से जानते थे। मानो हृदय ही फूला...
ट्राम में एक याद
चेतना पारीक कैसी हो? पहले जैसी हो? कुछ-कुछ ख़ुश कुछ-कुछ उदास कभी देखती तारे कभी देखती घास चेतना पारीक, कैसी दिखती हो? अब भी कविता लिखती हो? ...