प्रेम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
प्रेम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 16 मार्च 2025

प्रेम

 मुमकिन है बहुत कुछ

आसमान से चिपके तारे अपने गिरेबां में सजा लेना

शब्दों की तिजोरी को लबालब भर लेना


देखो तो इंद्रधनुष में ही इतने रंग आज भर आए

और तुम लगे सोचने

ये इंद्रधनुष को आज क्या हो गया!


सुर मिले इतने कि पूछा खुद से

ये नए सुरों की बारात यकायक कहाँ  से फुदक आई?


भीनी धूप से भर आई रजाई

मन की रूई में खिल गए झम-झम फूल


प्रियतम,

यह सब संभव है, विज्ञान से नहीं,

प्रेम में आँखें खुली हों या मुंदी

जो प्रेम करता है

उसके लिए कुछ सपना नहीं

बस, जो सोच लिया, वही अपना है।


-वर्तिका नन्दा

---------------

-हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 

बुधवार, 24 जुलाई 2024

प्रेम

किसी चट्टान की
खुरदुरी सतह पर उभरी
किसी दरार पर
हौले से अपना हाथ यूँ रखो
मानो पूछ रहे हो
उससे उसकी खैरियत।

तुम देखना
कुछ समय बाद
वहाँ कोई कोंपल फूट गई होगी
अथवा
उस दरार में
पानी के निशान होंगे।
 
- सुरेश बरनवाल
------------------

हरप्रीत सिंह पुरी के सौजन्य से 

शनिवार, 18 मई 2024

प्रेम

तुम
इस बात से
अनजान थीं
और मैंने भी तुम्हें
कुछ नहीं बताया था
तुम रोती रहीं
और हाथ हिलाती रहीं
मैं तुमसे
प्रेम करते हुए
लौट आया था

- अनिल जनविजय
---------------------

हरप्रीत सिंह पुरी की पसंद